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सुरेश खन्ना ने IAS प्रशिक्षुओं को दिया वो जादुई मंत्र जो बदल देगा पूरी जिंदगी!

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सुरेश खन्ना ने IAS प्रशिक्षुओं को दिया वो जादुई मंत्र जो बदल देगा पूरी जिंदगी!

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ राजनेता और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने हाल ही में राज्य के नवनियुक्त आईएएस प्रशिक्षुओं को एक ऐसा संदेश दिया जो न केवल उनके प्रशासनिक जीवन को बल्कि उनकी पूरी सोच को बदल सकता है। यह संदेश था — संवेदनशीलता का, जनता से जुड़ाव का और सच्ची सेवा का।

सुरेश खन्ना का IAS प्रशिक्षुओं से संवाद — एक प्रेरणादायक क्षण

सुरेश खन्ना ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान युवा अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें याद दिलाया कि एक आईएएस अधिकारी का असली काम केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करना नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक एक अधिकारी आम जनता की पीड़ा को महसूस नहीं करता, तब तक वह वास्तव में अपना कर्तव्य नहीं निभा सकता।

उन्होंने आईएएस प्रशिक्षुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सरकारी सेवा एक विशेषाधिकार है, बोझ नहीं। इस विशेषाधिकार का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाने में होना चाहिए।

संवेदनशीलता — एक अधिकारी की सबसे बड़ी शक्ति

सुरेश खन्ना ने जोर देकर कहा कि संवेदनशीलता किसी अधिकारी की कमजोरी नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है। जो अधिकारी जनता के दर्द को समझता है, वही बेहतर नीतियां बना सकता है और उन्हें जमीनी स्तर पर लागू कर सकता है।

संवेदनशील अधिकारी की पहचान क्या है?

  • वह जनता की समस्याओं को धैर्य से सुनता है।
  • वह हर निर्णय लेने से पहले उसके प्रभाव का आकलन करता है।
  • वह कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज बनता है।
  • वह पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देता है।

प्रशिक्षुओं को दिए गए मुख्य सूत्र

सुरेश खन्ना ने प्रशिक्षुओं को कुछ व्यावहारिक और अनमोल सूत्र भी दिए। उन्होंने कहा कि हर अधिकारी को ये बातें हमेशा याद रखनी चाहिए:

सेवा भाव को सर्वोच्च रखें

पद और शक्ति का अहंकार एक अधिकारी को जनता से दूर कर देता है। इसलिए हमेशा विनम्रता और सेवा भाव के साथ काम करें।

समस्याओं का समाधान ढूंढें, बहाने नहीं

सुरेश खन्ना ने कहा कि एक कुशल अधिकारी वह होता है जो हर चुनौती में अवसर देखता है। जनता को उत्तर चाहिए, बहाने नहीं।

युवा अधिकारियों में जोश और उम्मीद का संचार

इस संवाद के बाद आईएएस प्रशिक्षुओं में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिला। कई प्रशिक्षुओं ने बताया कि सुरेश खन्ना ने जो बातें कहीं, वे उन्हें पाठ्यपुस्तकों में नहीं मिली थीं। यह अनुभव उनके लिए एक असली जीवन पाठ बन गया।

प्रशासनिक सेवाओं में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की यह पहल निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी। सुरेश खन्ना ने जो बीज बोए हैं, वे आने वाले समय में एक बेहतर और जनोन्मुखी प्रशासन के रूप में फलेंगे।

अंत में यही कहा जा सकता है कि जब नीति-निर्माता और जनप्रतिनिधि इस तरह युवा अधिकारियों का मार्गदर्शन करते हैं, तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और भी सशक्त होती है।

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